मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना

मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना

राजस्थान के पशुपालकों के दुधारू पशुओं का एक साल का मुफ़्त बीमा। पशु की मृत्यु होने पर ₹40,000 तक की सहायता, और पशुपालक को एक रुपया भी प्रीमियम नहीं देना।

  • ₹0पशुपालक का प्रीमियम
  • ₹40,000गाय, भैंस, ऊंट पर अधिकतम
  • ₹4,000भेड़ व बकरी पर अधिकतम
  • 21 कार्य दिवसक्लेम भुगतान की समय-सीमा

योजना का परिचय

राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन आजीविका की रीढ़ है। कई परिवारों की पूरी कमाई एक या दो दुधारू पशुओं पर टिकी होती है। बीमारी, सड़क हादसे, आकाशीय बिजली या ज़हरीला चारा खाने से किसी पशु की अचानक मृत्यु हो जाए, तो परिवार पर बड़ा आर्थिक बोझ आ पड़ता है।

इसी नुकसान से बचाने के लिए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना शुरू की है। इसकी घोषणा उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दीया कुमारी ने 10 जुलाई 2024 को अनुपूरक बजट में की थी। यह पिछली सरकार की मुख्यमंत्री कामधेनु पशु बीमा योजना का नया रूप मानी जाती है। इसे "राजस्थान पशुधन बीमा योजना" भी कहा जाता है।

योजना का पूरा प्रीमियम राज्य सरकार बीमा कंपनी को देती है। पशुपालक को सिर्फ़ पंजीकरण कराना है और पशु के कान में टैग लगवाना है।

अब तक की प्रगति
  • पहले चरण (2024-25) का लक्ष्य 21 लाख पशुओं का बीमा था, जिस पर ₹400 करोड़ का बजट रखा गया। इसमें 5-5 लाख गाय, भैंस, भेड़ और बकरी तथा 1 लाख ऊंट शामिल थे।
  • दूसरे चरण की शुरुआत 1 दिसंबर 2025 को हुई। इसमें 42 लाख दुधारू पशुओं के निःशुल्क बीमा का लक्ष्य है, यानी पहले चरण से दोगुना।
  • पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक के अनुसार अब तक 34.34 लाख से अधिक पशुओं का पंजीकरण हुआ और 19.37 लाख पशुओं की पॉलिसी जारी हुई। फरवरी 2026 तक 10,756 दावों का निस्तारण कर ₹20 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया।

मुख्य विशेषताएं

  • निःशुल्क बीमा: पशुपालक से कोई प्रीमियम नहीं लिया जाता।
  • एक वर्ष की पॉलिसी: बीमा एक साल के लिए मान्य है और अगले साल नवीनीकरण कराना होगा।
  • लॉटरी से चयन: पंजीकरण के बाद बीमा के लिए चयन लॉटरी से होता है। गोपाल क्रेडिट कार्ड धारक और लखपति दीदी पशुपालकों को प्राथमिकता मिलती है।
  • आरक्षण: अनुसूचित जाति के पशुपालकों को 16% और अनुसूचित जनजाति को 12% आरक्षण का प्रावधान है।
  • ईयर टैगिंग अनिवार्य: जिस पशु के कान में टैग नहीं है, उसका बीमा नहीं होगा।
  • जन आधार अनिवार्य: लाभ केवल जन आधार कार्ड धारक पशुपालकों को मिलता है।
  • ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन: आधिकारिक पोर्टल, मोबाइल ऐप या नज़दीकी ई-मित्र केंद्र से।

पात्रता

  • आवेदक राजस्थान का स्थायी निवासी हो और उसके पास जन आधार कार्ड हो।
  • पशुपालक की वार्षिक आय ₹8 लाख से अधिक न हो।
  • पशु किसी अन्य बीमा योजना में बीमित न हो।
  • पशु की आयु निर्धारित सीमा में हो (नीचे तालिका देखें)।
  • पशु के कान में टैग लगा हो।
प्रति पशुपालक अधिकतम संख्या (योजना दिशानिर्देश के अनुसार)

2 दुधारू गाय, या 2 दुधारू भैंस, या 1 गाय और 1 भैंस, या 10 बकरी, या 10 भेड़, या 1 ऊंट।

बीमित पशु, आयु और बीमा राशि

पशुआयु सीमामूल्य निर्धारण का आधारअधिकतम राशि
दुधारू गाय3 से 12 वर्षकम से कम ₹3,000 प्रति लीटर दैनिक दूध क्षमता₹40,000
दुधारू भैंस4 से 12 वर्षकम से कम ₹4,000 प्रति लीटर दैनिक दूध क्षमता₹40,000
भेड़ (मादा)1 से 6 वर्षनिर्धारित मानक₹4,000
बकरी (मादा)1 से 6 वर्षनिर्धारित मानक₹4,000
ऊंट (नर व मादा)2 से 15 वर्षनिर्धारित मानक₹40,000

बीमा राशि पशु की आयु, दूध क्षमता और नस्ल के आधार पर तय होती है, इसलिए हर पशु पर पूरे ₹40,000 मिलना ज़रूरी नहीं है। ₹40,000 केवल ऊपरी सीमा है।

मिलने वाले लाभ

  • बीमित पशु की प्राकृतिक मृत्यु या दुर्घटना में मृत्यु पर आर्थिक सहायता। इसमें आग, सड़क हादसा, आकाशीय बिजली, प्राकृतिक आपदा, ज़हरीला चारा या कीड़े के काटने से और बीमारी से हुई मृत्यु शामिल है।
  • क्लेम की राशि सीधे पशुपालक के बैंक खाते में आती है।
  • क्लेम स्वीकार होने के बाद भुगतान की समय-सीमा 21 कार्य दिवस है।
  • टैग खो जाने पर विभाग एक कार्य दिवस में नया टैग लगाकर सॉफ़्टवेयर में दर्ज करने का प्रावधान रखता है।

ज़रूरी दस्तावेज़

पंजीकरण के समयक्लेम के समय
निवास प्रमाण
जन आधार कार्ड
आधार कार्ड
बैंक खाते का विवरण
मोबाइल नंबर
पशु के साथ आवेदक की फोटो
आधार कार्ड
जन आधार कार्ड
बैंक खाते का विवरण
पोस्टमार्टम रिपोर्ट
बीमा पॉलिसी के दस्तावेज़
मृत पशु की फोटो

आवेदन कैसे करें

पंजीकरण के लिए कोई शुल्क नहीं है। सबसे पहले पशु के कान में टैग लगवाना ज़रूरी है।

  1. पशु को टैग लगवाएं। नज़दीकी पशु चिकित्सालय से ईयर टैग लगवाएं।
  2. पोर्टल खोलें। आधिकारिक वेबसाइट mmpby.rajasthan.gov.in पर जाएं और "पंजीकरण के लिए क्लिक करें" चुनें।
  3. फॉर्म भरें। जन आधार, पशु का टैग नंबर, प्रजाति, आयु जैसी जानकारी सही-सही दर्ज करें।
  4. दस्तावेज़ अपलोड करें। ऊपर बताए पंजीकरण दस्तावेज़ और पशु के साथ अपनी फोटो जोड़ें, फिर फॉर्म जमा करें।
  5. SMS का इंतज़ार करें। पंजीकरण की पुष्टि और बीमा पॉलिसी का लिंक मोबाइल पर SMS से आता है। लॉटरी में चयन के बाद पॉलिसी जारी होती है।
ऑफलाइन विकल्प

जिनके पास इंटरनेट या स्मार्टफोन नहीं है, वे अपने नज़दीकी ई-मित्र केंद्र पर दस्तावेज़ ले जाकर पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीकरण की पुष्टि और पॉलिसी लिंक यहां भी SMS से मिलता है।

क्लेम कैसे करें

  1. मृत्यु की सूचना दें। बीमित पशु की मृत्यु होते ही हेल्पलाइन 181, नज़दीकी ई-मित्र केंद्र या पशु चिकित्सालय को बताएं।
  2. जांच और पोस्टमार्टम। बीमा कंपनी का सर्वेयर और पशु चिकित्सक मौके पर जांच करते हैं। पशु चिकित्सक पोस्टमार्टम कर रिपोर्ट बनाते हैं।
  3. दावा प्रपत्र भरें। प्रपत्र सर्वेयर या पशु चिकित्सालय से मिलता है। मृत्यु के 21 दिन के भीतर इसे भरकर सभी दस्तावेज़ों के साथ पशु चिकित्सालय में जमा करें।
  4. बीमा कंपनी की प्रक्रिया। पॉलिसी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बैंक विवरण, पंचनामा और मृत पशु की फोटो बीमा कंपनी की वेबसाइट पर दर्ज की जाती हैं।
  5. बैंक खाते में भुगतान। दावा स्वीकार होने पर राशि सीधे खाते में आती है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • बिक्री या उपहार: बीमित पशु बेचने या किसी को देने पर पॉलिसी रद्द मानी जाएगी।
  • टैग खोने पर: तुरंत बीमा विभाग को सूचना दें, ताकि नया टैग लगाकर रिकॉर्ड अपडेट हो।
  • समय पर सूचना: मृत्यु की जानकारी देर से देने पर क्लेम में अड़चन आ सकती है।
  • पशु की संख्या और आयु: सीमा से अधिक पशु या आयु-सीमा से बाहर के पशु का बीमा नहीं होता।
एक ज़रूरी सच्चाई

कई ज़िलों से पॉलिसी जारी होने में देरी और क्लेम अटकने की शिकायतें समाचारों में आई हैं। इसलिए पंजीकरण की रसीद, पॉलिसी का SMS, टैग नंबर और क्लेम के हर दस्तावेज़ की फोटोकॉपी या फोटो संभालकर रखें। शिकायत हो तो हेल्पलाइन 181, पशु चिकित्सालय या पशुपालन विभाग की हेल्पलाइन पर दर्ज कराएं।

नियम बदल सकते हैं

इस लेख की पात्रता, पशु-संख्या और राशि संबंधी जानकारी योजना के दिशानिर्देशों पर आधारित है। दूसरे चरण में कुछ नियम या तिथियां बदली हो सकती हैं। आवेदन से पहले आधिकारिक पोर्टल या अपने नज़दीकी पशु चिकित्सालय से ताज़ा नियम ज़रूर जांच लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या इस योजना में पशुपालक को कुछ पैसा देना पड़ता है?

नहीं। पूरा प्रीमियम राज्य सरकार देती है। पंजीकरण और आवेदन भी निःशुल्क है।

पशु की मृत्यु पर अधिकतम कितना पैसा मिलेगा?

गाय, भैंस और ऊंट पर अधिकतम ₹40,000 और भेड़-बकरी पर अधिकतम ₹4,000। वास्तविक राशि पशु की आयु, दूध क्षमता और नस्ल पर निर्भर करती है।

क्या पंजीकरण के बाद बीमा अपने आप हो जाता है?

नहीं। पंजीकरण के बाद लॉटरी से चयन होता है। चयनित पशुओं की पॉलिसी जारी होती है और उसका लिंक SMS से मिलता है। गोपाल क्रेडिट कार्ड धारकों और लखपति दीदी को प्राथमिकता दी जाती है।

क्या बिना टैग वाले पशु का बीमा हो सकता है?

नहीं। पंजीकरण से पहले पशु के कान में टैग लगवाना अनिवार्य है।

क्या पशु की मृत्यु के बाद पंजीकरण कराकर क्लेम लिया जा सकता है?

नहीं। क्लेम केवल उसी पशु का मिलता है जिसकी वैध पॉलिसी मृत्यु से पहले जारी हो चुकी हो।

क्या सभी पशु इस योजना में आते हैं?

नहीं। केवल दुधारू गाय, दुधारू भैंस, मादा भेड़, मादा बकरी और ऊंट (नर व मादा) बीमित किए जाते हैं।

बीमा पॉलिसी कितने समय की होती है?

एक वर्ष की। अगले साल दोबारा आवेदन या नवीनीकरण कराना होगा।

आधिकारिक लिंक व संपर्क

हेल्पलाइन

पशुपालन विभाग हेल्पलाइन: 0141-2742709
मृत्यु की सूचना हेतु: 181
पता: पशुपालन विभाग, टोंक रोड, लाल कोठी, जयपुर 302015

अस्वीकरण: infobox.in किसी सरकारी विभाग से संबद्ध नहीं है। यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और समाचारों पर आधारित है। आवेदन से पहले आधिकारिक पोर्टल पर नियम व तिथियां ज़रूर जांच लें।

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